मेरा रब जानता

मैं सच्चा या झूठा मेरा रब जानता।
तू कुछ जानती। वो सब जानता।

मेरे हौसलों को उड़ान मिली बस तेरे साथ से।
सवेर की कद्र होती बीती काली रात से।
ना भूख से अब रिश्ता। ना किसी प्यास से।
फुरसत ही ना मिलती तेरे ख्यालात से।

मेरे दिल में बसा मेरी रूह से जुड़ा।
मेरे दिल का वो हर एक सबब जानता।
मैं सच्चा या झूठा मेरा रब जानता।
तू कुछ जानती। वो सब जानता।

ज़िन्दगी की डोर में पिरोया तुझको।
टूटे ना ये डोर यूँ संझोया तुझको।
ज़िन्दगी का मेरी बेशकीमती हीरा है तू।
खो देंगे खुद को जो खोया तुझको।

दिल में है दर्द बस कुछ बातों का।
तू ना समझे मेरी वो हर तलब जानता।
मैं सच्चा या झूठा मेरा रब जानता।
तू कुछ जानती। वो सब जानता।

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