कोई दे तू आशीर्वाद माँ।

The world is getting smarter in terms of technology. And in this smart world, people are busy in proving their smartness. They are so busy in discovering new paths that they are forgetting with whom they took their 1st step.

You call her by different names like Mum, Mother, Mummy, Mom. But believe me when you speak the word Maa (माँ), it lifts you higher exactly like our mother was used to doing this when we were kids. Here I am sharing my 1st poetry which is very closed to me and I wrote it for my Maa when I felt lost and broken. These are lines of a boy whose mom was hurt because he was so busy in proving his smartness to the world.

Maaa

 

मुझे फिर दोबारा लड़ना है।
कोई दे तू आशीर्वाद माँ।

ना मिलता गर तेरा प्यार है।
फिर जीवन में अन्धकार है।
नसीब अपना गया हार है।
अब माँ की ही पुकार है।
दिल में वही जगह दो ना।
हम है तेरी औलाद माँ।
मुझे फिर दोबारा लड़ना है।
कोई दे तू आशीर्वाद माँ।

मेरे हौसले इतने कमजोर नहीं।
जो टूट जाऊँ मैं वो डोर नहीं।
माँ तू तो अब मुख मोड़ नहीं।
इक तू ही मेरी कोई और नहीं।
माँ की दुआओं में होता है असर।
फिर कर कोई फरियाद माँ।
मुझे फिर दोबारा लड़ना है।
कोई दे तू आशीर्वाद माँ।

कुछ बातों से तू आहत है।
दिल में तेरे कड़वाहट है।
सीने लग रोऊँ ये चाहत है।
ऐसे मिलनी अब राहत है।
भूल के सारी बातों को।
फिर कर मुझको आबाद माँ।
मुझे फिर दोबारा लड़ना है।
कोई दे तू आशीर्वाद माँ।

मैं हारा हूँ पर झुका नहीं।
थोडा ठहरा हूँ पर रुका नहीं।
कुछ भी अब तुझसे लुका नहीं।
रुख अब और रुखा नहीं।
वो बचपन फिर से जीना है।
कर बचपन फिर से याद माँ।
मुझे फिर दोबारा लड़ना है।
कोई दे तू आशीर्वाद माँ।

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