देसी vs शहरी

It’s a story of a villager boy who has his name, fame in his village. He falls in love with a modern girl from a town.
And there becomes a gap between both as it’s becoming difficult for each other to adopt each other’s lifestyle.

The girl wants the boy to enjoy city life like living in flats, going to disc and roaming in nights. But the villager boy is very happy in his desi life.
He enjoys his Haryanvi culture, the fields, ride of his Royal Enfield.

Desi YP

Jelly चुस्सण की आदत तेरी, तेरै कित पचैगी जाम्मण ।
चुन्नी तक तै सँभलती कोन्या, तेरतै कित सँभलैगा दामण ।
तू 40 गज मै रहण आली, म्हारै किल्लै जितणा आँगण ।
थोङे से मै ए कसूती कहगा, एँडी ए पङा सै बाम्मण ।

मन्ने बुल्ट का तगड़ा चस्का सै। तनै चस्का महंगी कारां का।
मन्ने सीत राबड़ी भावै सै। तन्ने शौक सै बियर बारां का।
तेरी यारी हमेशा फीकी रही, तन्ने के बेरा अणमुल्ले यारां का।
मैं पीछै हट कै देखूँ ना। जाण ले अंदाज़ दिलदारां का।

तू video chat की तोड़ी होड़, मैं बात करा करूँ face to face ।
मैं पन्डित लख्मीचंद की सुणु रागनी, तू Pitbull का सुणै कलेश ।
दीखे तन ढक्या होड़ सुथरा रह सै, पर तू पहरे backless ..
मैं आप भोले का डोरा पहरु, तू मांगे मेरते necklace ..

तू विलायती काम्बल मै सिकुड़ी पड़ी रह, मैं जी सा लेरा सोड़ का ।
तेरी पईसाँ की आक्कड़ घणी, मेरे धोरे इलाज़ तेरी मरोड़ का ।
तेरा bank balance धरा रह जागा, जब म्हारा किल्ला बिकैगा करोड़ का ।
तू चंडीगढ़ तै पूछती आवेगी, के कित सै वो छोरा दत्तौड़ का ।

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Written By: Yogesh Parashar
गाँव : दत्तौड़
जिला : रोहतक (हरयाणा)

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