आज़ादी

One of my friend who broke up today with his girlfriend and was crying badly. I wrote this for him.
Hope you like these words. He is feeling good after reading this.
Well! It’s the bitter truth of this world. We choose people who will have existence in our life as per our needs.


जब काम पड़े तो, जी हुज़ूरी होती है।
काम निकल जाए तो फिर दूरी होती है।
रिश्ते भी बनते है, ज़रुरत के हिसाब से।
तोड़ने के वक़्त, मजबूरी होती है।

समझ जाएगा मुन्ना जब इस बात को।
सोयेगा आराम से ना रोयेगा तू रात को।
रोते रोते और तू कितनो को रुलाएगा।
जीतेगा तू तभी जब भूलेगा इस मात को।

प्यार तुझे होया था तो गीत बड़े गाये थे।
समझ ना पाया बेटा वो तो बस साये थे।
अँधेरा हुआ तो साया छोड़ देगा साथ को।
अब भी पराये हैं। वो पहले भी पराये थे।

चल भौकना तू छोड़ दे। और लिखना स्टार्ट कर।
कोई ना सुने तो बेटा खुद से ही बात कर।
तेरी मेहनत ही तेरे नसीब को बनाएगी।
कुछ ना मिलेगा बेटा किसी के तलवे चाट कर।

चल उठ! मत बैठ! कर काम कोई अपना।
नींद ही तो टूटी है। ना टूटा तेरा सपना।
दिन है आज़ादी का और तू भी तो आज़ाद है।
ले फिर से उड़ान। ना ज़मीन पे पैर रखना।


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