आग़ाज़ से ना डर

Many a time in our life, we are in a situation where we stand and take some time in deciding the things. We pause everything around us and keep thinking that what will happen next if I go with that decision. Well! In that case, listen what your soul says and just go for it and fight for it and prove it right in the end.

The beginning is always the hardest. Don’t give up.

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I am trying to elaborate the above quote with my poem.
आग़ाज़ कर हौसले से, तू अंजाम से ना डर।
कल फिर सवेरा होगा, इस शाम से ना डर।
दिल में ख़ुद तेरे अंदर इक भगवान् बसा है।
तू फिर दुनिया के बनाए, रहीम राम से ना डर |

ज़िन्दगी में कुछ पल, होते हैं अजीब से।
किस्मत खेल खेलती है, सबके नसीब से।
कमज़ोर वक़्त में ना ख़ुद को कमज़ोर बना देना।
हर वक़्त में जीना होगा, तुझको तहज़ीब से।

ना सोच के उदास हो, कि अलफ़ाज़ ना मिला।
क्यों शिकायत करना, कि कोई साज़ ना मिला।
हसीं तेरा आज ग़र हो तो, हसीं तेरा कल भी होगा। 
फिर ना कहना हसीं कल के लिए हमें आज ना मिला।

कलम ले के तो बैठो तुम, खुद अलफ़ाज़ देगा वो।
तराने खुद होंगे सरगम में, खुद ही साज़ देगा वो।
मिला जीवन तू इसको जी, ना कोई वक़्त ज़ाया कर।
जवाब भी खुद ही दे देगा, गर कोई राज़ देगा वो।
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